जॉन एलिया ❤️🔥
मेरे मुकद्दर में तू लिखी थी जहां तक शायद वह यही है पल..
तूने अपना मुकद्दर खुद बदला चुना किसी ओर को जिसे नहीं है इश्क़ पे लिखने की अकल..
तुमने लोगो को अक्सर देखा होगा रोते रातों को तन्हाई में ये शिवम् पढ़ता है मुर्शीद Jaun Elia को तभी शायरी लिखता है याद करके तेरी शक्ल..
जान- ए- जां आबाद रहेगा ये इश्क़ हमारा..मगर तू जश्न मना उसके साथ भला मैं क्यों दु तुम्हारी जिंदगी में दखल..
~$hivam📚✍🏼

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